
कहते हैं कि दिल में कुछ करने की इच्छा हो,तो रास्ते अपने आप बन जाते हैं।इस बात को सच साबित करती हैं,पर्वतारोही प्रेम कुमार की मेहनत और लगन जिन्होंने माउंट एवरेस्ट की दुर्गम परिस्थितियों का सामना कर अपने लक्ष्य को हासिल किया और यह साबित कर दिखाया कि सच्ची लगन और मेहनत से हर मुश्किल राह आसान हो जाती है!छोटी उम्र में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह कर चुके बिहार के मढ़ौरा से ताल्लुक रखने वाले पर्वतारोही प्रेम कुमार को नेपाल के राष्ट्रपति द्वारा काठमांडू में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में सम्मानित किया गया।

नेपाल सरकार द्वारा आयोजित इस“एवरेस्ट समिटियर्स समिट 2026”में दुनिया भर के एवरेस्ट पर्वतारोहियों का भव्य संगम देखने को मिला।इस विशेष आयोजन का उद्देश्य विश्वभर के उन पर्वतारोहियों को एक मंच पर लाना था,जिन्होंने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह किया है।भारत के प्रसिद्ध पर्वतारोही और 2013 में माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई कर चुके प्रेम कुमार सिंह को भी इस समिट में विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।उन्हें उनके पर्वतारोहण इतिहास और एवरेस्ट सहित विभिन्न पर्वत अभियानों में योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

यह कार्यक्रम काठमांडू में आयोजित हुआ,जिसमें अमेरिका,नेपाल,चीन,भारत,तुर्की,ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम सहित कई देशों के पर्वतारोही शामिल हुए।समिट के दौरान पर्वतारोहण समुदाय से जुड़े अनुभवों,चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की गई।समारोह का उद्घाटन नेपाल के राष्ट्रपति ने किया।उन्होंने सभी एवरेस्ट पर्वतारोहियों के साथ विशेष नाश्ते में भाग लेकर आयोजन की शुरुआत की।इस दौरान पर्वतारोहियों के साहस,समर्पण की सराहना की गई।कार्यक्रम में बिहार के मढ़ौरा से ताल्लुक रखने वाले पर्वतारोही प्रेम कुमार सिंह की उपस्थिति और सम्मान को भारत के पर्वतारोहण समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

इस भव्य कार्यक्रम का मुख्य विषय “स्थायी भविष्य के लिए हिमालयी नवाचार”था,जिसमें नेपाल के राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल सहित कई दिग्गज पर्वतारोही और गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।इस सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव,हिमालयी संरक्षण,नैतिक पर्यटन और पर्वतारोहण में तकनीकी नवाचार जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा की गई,इसके साथ ही नेपाल के पर्यटन विधेयक पर भी विचार-विमर्श हुआ।यह समिट 29 मई को मनाए जाने वाले “अंतर्राष्ट्रीय एवरेस्ट दिवस’ की पूर्व संध्या/सप्ताह के दौरान पर्वतारोहियों के विशाल समुदाय को जोड़ने और उनके अनुभवों को सांझा करने का मुख्य मंच बनी।

