कहा,स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र की शक्ति और जिम्मेदार पत्रकारिता उस शक्ति का विवेक,समाज में उत्कृष्ट कार्य कर रहे व्यक्ति को किया सम्मानित।

राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि मौजूदा परिप्रेक्ष्य में युवाओं में बढ़ता नशा,महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा,पर्यावरण संरक्षण,साइबर अपराध,डिजिटल माध्यमों पर भ्रामक सामग्री और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना ऐसे विषय हैं,जिन पर मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकती है।उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का दायित्व है कि वह जनसमस्याओं को सामने लाए,प्रशासन को जवाबदेही का बोध कराए और उन लोगों की आवाज बने,जिनकी बात अक्सर बड़े मंचों तक नहीं पहुँच पाती।उन्होंने कहा कि जहां स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र की शक्ति है वहीं जिम्मेदार पत्रकारिता उस शक्ति का विवेक।दोनों का साथ रहना आवश्यक है।राज्यपाल शिमला में एक निजी न्यूज़ चौनल द्वारा आयोजित जैम्स ऑफ हिमाचल अवार्ड-2026 समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।उन्होंने कहा कि किसी भी मीडिया संस्थान की यात्रा केवल उसके प्रसारण,पाठक संख्या या दर्शकों से नहीं मापी जानी चाहिए। उसकी असली पहचान इस बात से बनती है कि उसने समाज की कितनी आवाजों को स्थान दिया,कितनी समस्याओं को जिम्मेदारी के साथ सामने रखा और कितने सकारात्मक प्रयासों को लोगों तक पहुँचाया।उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण है।मीडिया नागरिकों को सूचित करता है,शासन और समाज के बीच संवाद का माध्यम बनता है और जनहित के प्रश्नों को व्यापक मंच प्रदान करता है।वह घटनाओं का विवरण देने का माध्यम तो है ही साथ ही,समाज की चेतना को दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण शक्ति भी है।श्री कविंद्र गुप्ता ने कहा कि आज भारत तेजी से बदल रहा है।डिजिटल तकनीक,कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सोशल मीडिया ने समाचारों के प्रसार को अभूतपूर्व गति दी है।अब किसी घटना की सूचना कुछ ही क्षणों में लाखों लोगों तक पहुँच सकती है।इससे जनसंवाद के नए अवसर खुले हैं,लेकिन,इसके साथ कुछ गंभीर चुनौतियाँ भी सामने आई हैं।भ्रामक सूचनाएँ,अपुष्ट खबरें,छेड़छाड़ किए गए वीडियो और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार की गई नकली सामग्री लोगों के विश्वास और सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर सकती हैं।ऐसे समय में पत्रकारिता की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।उन्होंने कहा कि समाचारों की प्रतिस्पर्धा में सबसे पहले पहुँचने से अधिक महत्वपूर्ण है,सही जानकारी के साथ पहुँचना।उन्होंने कहा कि मीडिया को सनसनी के स्थान पर सत्य,नकारात्मकता के बीच समाधान और विभाजनकारी विमर्श के स्थान पर संवाद को प्रोत्साहित करना चाहिए।इसका अर्थ समस्याओं को छिपाना या आलोचना से बचना नहीं है।बल्कि समस्याओं को उजागर करते समय तथ्यों,संतुलन और जनहित को सर्वाेपरि रखना है।विकसित भारत का लक्ष्य तभी सार्थक होगा,जब विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और नागरिकों में अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूकता बढ़े।इस दिशा में मीडिया सरकार की योजनाओं और जनकल्याणकारी पहलों की सही जानकारी लोगों तक पहुँचाने के साथ-साथ उनके क्रियान्वयन से जुड़े प्रश्नों को भी जिम्मेदारी से सामने ला सकता है।राज्यपाल ने इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रहे विभिन्न व्यक्तियों को सम्मानित किया।
